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ब्रिक्स: मोदी की सफल कूटनीति के सामने चीन की एक न चली

लाइव इंडिया न्यूज- नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपने सफल कूटनीतज्ञ होने का परिचय दिया है.देर से ही सही मगर भारत ने चीन से गोवा का कूटनीतिक बदला शियामेन में चुका ही लिया. बीते साल गोवा में ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहे भारत ने तब आतंकवाद पर रूस की चुप्पी के कारण चीन से मात खाई थी. वक्त बदला और इस बार शियामेन शहर में ब्रिक्स की मेजबानी कर रहे चीन को भारत ने अपना स्टैंड मानने के लिए मजबूर कर दिया. तब चीन की जिद की कारण पाकिस्तानी आतंकी संगठन तो दूर भारत ब्रिक्स के घोषणा पत्र में बमुश्किल आतंकवाद पर गहरी चिंता को शामिल करा पाया था.

जैश-ए-मोहम्मद के नाम शामिल मगर इस बार अपनी मेजबानी में बिक्स के मंच से आतंकवाद की चर्चा न कराने पर अड़े चीन को न सिर्फ इस पर चर्चा करानी पड़ी, बल्कि वह घोषणा पत्र में पाकिस्तान में फल फूल रहे आतंकी संगठनों लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तहरीक ए तालिबान और हिज्ब उत ताहिर का नाम भी शामिल कराने से भी नहीं रोक सका. दरअसल बीते साल अक्टूबर महीने में गोवा में हुई ब्रिक्स देशों की बैठक में भारत अंत तक आतंकवाद पर चर्चा के साथ पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठनों का नाम घोषणा पत्र में शामिल कराने पर अड़ा रहा.

इसके तहत घोषणा पत्र तैयार होते समय भारत ने अपनी ओर से इस आशय का प्रस्ताव भी  दिया. मगर उस दौरान चीन ने पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का नाम डाले जाने का कड़ा विरोध किया और रूस की साधी गई रणनीतिक चुप्पी केकारण भारत घोषणा पत्र में सिर्फ यही पंक्ति शामिल करा पाया कि अपनी सीमा से आतंकवादी हमले रोकना सभी देशों की जिम्मेदारी है। मसूद पर बैन के सवाल पर चीन ने साधी चुप्पी गौरतलब है कि तब भारत पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले से न सिर्फ आगबबूला था, बल्कि आतंकवाद के सवाल पर पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर अलग थलग करने की मुहिम भी छेड़ रखी थी.


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